बदहाल शिक्षा व्यवस्था का जिम्मेदार कौन
कुछ दिनों पहले हुई उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं में जो तथ्य सामने आए हैं, वह वाकई में शर्मसार कर देने वाले हैं। या यूं कहें कि जिन तथ्यों को सरकार द्वारा जनता को एक सुंदर थाली में सजाकर पेश किया गया है, वह चैकाने वाले हैं। दस लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने इस वर्ष उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षाएं छोड़ दी है, और जिस प्रकार उत्तर पुस्तिकाओं को जांचा जा रहा है उसको देख बस हंसी ही आती है। प्रदेश के डिप्टी सी.एम डॉ. दिनेश शर्मा की माने तो यह सब नकल माफियाओं पर सख्ती व मुख्यमंत्री जी के जादुई ग्यारह निर्देशों का असर है। परंतु सवाल उठता है कि आखिर क्यों इन छात्र-छत्राओं को इनकी जरूरत पड़ी ? क्या कक्षा में शिक्षक उपस्थित नहीं थे ? या छात्र ही अनुपस्थित रहे ? कई वर्षों से ये ट्रेंड बन गया है, आप विद्यालय बिना जाए भी 70ः अंक प्राप्त कर सकते हैं। प्रयोगात्मक परीक्षाओ में उपस्थित अनिवार्य नहीं है, बस रुपये भिजवा दो काम हो जाएगा। कुछ परीक्षा केंद्र तो आपकी अनुपस्थित में भी मुख्य परीक्षा करवाने की सहूलियत दे देते हैं। शिक्षा व्यवस्थ...