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सामाजिक सद्भाव और प्रेम का पर्व है- होली

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होली को पौराणिक संदर्भों के अनुसार भक्त प्रहलाद और उनकी बुआ होलिका के संदर्भ में व्याख्यायित किया गया है किन्तु वास्तव में यह कथा बुराई की पराजय और अच्छाई की विजय का प्रतीकार्थ देती है। अत्याचारी शासक हिरण्यकश्यप अपनी विपरीत विचारधारा वाले अपने ही पुत्र प्रहलाद को अपनी बहन होलिका के माध्यम से जला डालना चाहता है किंतु ईश्वरीय कृपा बुराई की प्रतीक होलिका को जलाकर प्रहलाद की रक्षा कर लेती है। इससे स्पष्ट होता है कि होली बुराई के विनाश और अच्छाई के संरक्षण का त्यौहार है। यह सत्यमेव जयते का संदेश भी है।           होली के पर्व पर रंगों का खेल मौसम के अनुरूप मानसिक उल्लास की अभिव्यक्ति है। बसंत का मादक परिवेश तन और मन-- दोनों को प्रफुल्लित करता है। यही प्रसन्नता रंग और गुलाल के माध्यम से सामाजिक धरातल पर व्यक्त होती है, जहां सवर्ण-असवर्ण, धनी-निर्धन, विद्वान और सामान्य-- सब मिलकर परस्पर रंग खेलते हैं। एक दूसरे को बधाई देते हैं। एक दूसरे के घर आते-जाते हैं और वर्ष भर के लड़ाई-झगड़े, गिले-शिकवे भूल कर गले लगते हैं। सामाजिक सद्भावना का यह पर्व सर्वथा अनूठा है।   सुयश म...

लोकतंत्र के हित में नहीं है टिकट के लिए पार्टी बदलना

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए घोषित नामांकन की अंतिम तिथियों में जिस प्रकार वरिष्ठ नेताओं ने अपने दल बदले हैं उस से उनकी पार्टी निष्ठा पर सीधे-सीधे प्रश्नचिन्ह लगते हैं। विधायक पद की प्रत्याशा में सैंतीस वर्ष तक एक ही दल में रहते हुए विधायक-सांसद मंत्री रहे एक वृद्ध नेता अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर विधायक टिकट के लिए अपनी धुरविरोधी रही दूसरी नई पार्टी में चले गए। जिसे कल तक गलत प्रचारित करते थे आज उसी का दामन थाम बैठे हैं। इसी प्रकार एक अन्य नेता अपनी पुरानी पार्टी से बगावत कर अपने पुत्र को एक अन्य पार्टी से टिकट दिला कर उसके समर्थन में चुनाव प्रचार करने का डंका पीट रहे हैं। यह केवल इन दो वरिष्ठ नेताओं के दल बदलने, बगावत करने की बात नहीं है। वास्तव में यह हमारे लोकतंत्र को चलाने वाली उस सत्ता लोलुप मानसिकता की बड़ी साक्षी है जो स्वार्थ सिद्धि के लिए, सत्ता सुख भोगने के लिए किसी भी सीमा तक गिरने को तैयार है। ‘प्यार और युद्ध में सब जायज है’का नारा उछालती हुई नेतृत्व की यह मूल्यविहीन छवि अपने सिवाय किसी का भला नहीं कर सकती। जो अपने दल का नहीं हुआ वह देश और समाज का क्या होगा? ऐसा नैत...

खतरनाक आभासी खेलों से बचें

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(आभासी खेल दिवस पर विशेष)   एक डरावनी शक्ल जिसकी दो बड़ी-बड़ी गोल आंखें हों , जिसकी एक डरावनी-सी मुखमुद्रा हो और अचानक ही आपके वाट्सऐप मैसेज पर अनजान नंबर से ऐसी तस्वीर आए तो शायद आप भयभीत हो जायेंगे। वैसे भी यह बात भयभीत करने वाली ही है क्योंकि यह तस्वीर है -- बच्चों के एक खतरनाक खेल की ।      बच्चों की जान लेने वाले खतरनाक खेल ‘ ब्लू व्हेल ’ का खौफ अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि एक नया खेल बच्चों की जान लेने के लिए आ गया है। इस खेल का नाम है -- ‘ मोमो गेम ’ । मोमो गेम को पिछले वर्ष आए ब्लू व्हेल गेम से भी अधिक खतरनाक माना जा रहा है। यह खेल भी बच्चों के लिए घातक साबित हो रहा है।       यह खेल सर्व प्रथम हमारे दिमाग के साथ खेलता है , डर का माहौल निर्मित करता है और उसके पश्चात जान ले लेता है। यह खेल वाट्सऐप मैसेज के जरिए किशोरों को अपना शिकार बनाता है। इस आभासी खेल में सबसे पहले बच्चों को अज्ञात नंबर से संदेश भेजा जाता है। इसके पश्चात इसी नंबर से बच्चों को डरावनी तस्वीर भेजकर कुछ टास्क दिए जाते हैं। जब खिलाड़ी किसी कार्य को कर...

शिक्षक - एक अनोखा किरदार

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         शिक्षक ईश्वर का दिया हुआ वह उपहार है, जो बिना किसी स्वार्थ व भेद भाव के अपने हर शिष्य को अच्छी से अच्छी शिक्षा देने का प्रयास करता है। शिक्षक का दर्जा हमेशा से ही पूजनीय रहा है। एक शिष्य के लिए उसके शिक्षक की बताई हुई बात पत्थर की लकीर के समान होती है , वह अपने पूजनीय माता-पिता को तो गलत बता देता है परन्तु अपने शिक्षक की बात को समर्थन देने में पीछे नहीं हटता। शिक्षक ही अपने विद्यार्थी का जीवन गढ़ता है।   वर्तमान में विद्यार्थी अपना आधा समय अपने शिक्षक , जो उसके जीवन में अलग-अलग किरदार निभा रहें हैं उनके साथ व्यतीत करता है। वह सही-गलत से लेकर जीवन के अनेक रंग अपने शिक्षक को देख व सुन कर सीखता है। शिक्षक के योगदान से ही एक व्यक्ति समाज मे रहने योग्य बनता है। इसीलिए शिक्षक को समाज का शिल्पकार भी कहा जाता है। जिस प्रकार एक डाॅक्टर मरीज को ठीक करने का हर मुमकिन प्रयास करता है , ठीक उसी प्रकार एक शिक्षक अपने विद्यार्थी को हर मोड़ पर राह दिखाता है। हर परिस्थिति में उसका हाथ थामने के लिए सदैव तैयार रहता है। तभी शिक्षक को ईश्वर तुल्य मा...